बसंत के आमोँ का मंजर,
बरसात के पानी का भँवर,
धधकती लू मेँ घर से बाहर
शायद मुझे भुल गया या छुट गया वो..........|
पेडोँ पे अटखेलियाँ करना,
नहरोँ मेँ गोते लगाना,
रोज शाम मेँ झगडे होना
शायद मुझे भुल गया या छुट गया वो.........||
अब तो मुझे प्यारा है.....
शहरोँ का खाली सा जीवन,
हर ओर वो आधुनिकीकरण
और सिर्फ अपने मेँ ही मग्न
शायद मुझे भुल गया या छुट गया वो......... बचपन|||
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